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Monday, August 3, 2026

पारद शिवलिंग :

पारद शिवलिंग :

पारद शिवलिंग :

सावन में पारद शिवलिंग घर लाने की बना रहे हैं योजना ? 

वास्तु गुरु से जरूर जान लें नियम :

श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री विष्णुपुराण, श्री भविष्य पुराण, श्री पद्म पुराण, श्री लिंगपुराण एवं श्री महाशिवपुराण के आधार पर जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली एवं गोचर ग्रहों के अनुसार विवेचन।

वास्तु और ज्योतिषशास्त्र में पारद शिवलिंग को अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। 

अगर आप इस सावन पारद शिवलिंग की स्थापना करने का विचार बना रहे हैं तो इससे पहले कुछ आवश्यक नियम जरूर जान लें। 


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Mercury Shivling AAA Quality | Mantra Siddha Parad Shivling (50g)

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{ About this item

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पारद शिवलिंग की स्थापना और पूजा से जुड़ी बातों का ख्याल रखने से बेहद शुभ फल प्राप्त होता है और परिवार के सदस्यों पर शिवजी की कृपा बनी रहती है।

सनातन धर्म में भगवान शिव को आदि देव, महाकाल, भोलेनाथ और समस्त ब्रह्माण्ड के संहार एवं पुनः सृजन के अधिष्ठाता माना गया है। 

शिवलिंग भगवान शिव के निराकार, अनंत और सर्वव्यापक स्वरूप का प्रतीक है। 

अनेक प्रकार के शिवलिंगों में पारद शिवलिंग का स्थान अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। 

शास्त्रों में वर्णित है कि शुद्ध विधि से सिद्ध एवं संस्कारित पारद शिवलिंग का पूजन करने से अनेक यज्ञों, तीर्थों और तपस्याओं के समान पुण्य प्राप्त होता है।

पारद शिवलिंग को ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में बहुत ही पवित्र और शुभ माना जाता है। 

ऐसे में अगर आप इस सावन अपने घर में पारद शिवलिंग की स्थापना करने वाले हैं तो इससे पहले कुछ जरूरी नियमों को जरूर जान लेना चाहिए। 

यह शिवलिंग चांदी और पारे के मिश्रण से बना होता है। 

ऐसे में इसे घर में रखने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है और इसे बहुत शक्तिशाली माना जाता है। 

यही कारण है की पारद शिवलिंग की पूजा में कुछ गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। 

पवित्रता और शुद्धता के लिए इसमें शोधन, मर्दन, बंधन, मूर्छन और मारण, इन 5 प्रक्रियाओं को शामिल किया जाता है। 

ऐसे में वास्तु गुरु मान्या कहती हैं कि सावन में पारद शिवलिंग लाने से पहले इसे स्थापित करने और पूजा के नियमों को जरूर जान लेना चाहिए। 

चलिए विस्तार से जानें इस बारे में।





पारद शिवलिंग घर में रखने के नियम :

ॐ नमः शिवाय।

सनातन धर्म में भगवान शिव को आदि देव, महाकाल, भोलेनाथ और समस्त ब्रह्माण्ड के संहार एवं पुनः सृजन के अधिष्ठाता माना गया है। 

शिवलिंग भगवान शिव के निराकार, अनंत और सर्वव्यापक स्वरूप का प्रतीक है। 

अनेक प्रकार के शिवलिंगों में पारद शिवलिंग का स्थान अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। 

शास्त्रों में वर्णित है कि शुद्ध विधि से सिद्ध एवं संस्कारित पारद शिवलिंग का पूजन करने से अनेक यज्ञों, तीर्थों और तपस्याओं के समान पुण्य प्राप्त होता है।

माना जाता है की पारद शिवलिंग को रखने के लिए हमेशा मिट्टी के छोटे बर्तन या साफ थाली का प्रयोग करना चाहिए। 

इसे आप स्टील, तांबे या चांदी की थाली में भी स्थापित कर सकते हैं। 

साथ ही, इसके नीचे एक साफ वस्त्र या केले का पत्ता अवश्य रखें।

वास्तु गुरु मान्या बताती हैं कि पारद शिवलिंग को सही दिशा में रखना अत्यंत आवश्यक होता है। 

वास्तुशास्त्र के अनुसार, पारद शिवलिंग को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में रखना चाहिए। 

इन दिशाओं को बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है।

पारद अर्थात संस्कारित पारा (Mercury) को भगवान शिव का तेजस्वी स्वरूप माना गया है। 

तांत्रिक, आगमिक तथा शैव परंपराओं में पारद शिवलिंग को अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी माना जाता है। 

श्रद्धा, शुद्धता और नियमपूर्वक इसकी पूजा करने से आध्यात्मिक उन्नति के साथ - साथ मानसिक शांति और धार्मिक संतोष की प्राप्ति होती है।

घर में पूजा के समय शिवलिंग के ठीक सामने बैठकर पूजा करनी चाहिए। 

ऐसा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। 

हालांकि, इस बात का ख्याल रखें की कभी भी शिवलिंग को सीधा फर्श पर नहीं रखना चाहिए।


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पारद शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं, क्या नहीं ?

आटा चढ़ाएं : पारद शिवलिंग को आटा अर्पित किया जा सकता है। 

वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, यह धरती से संबंधित होता है जिसके चलते इसे शिवजी पर अर्पित किया जा सकता है।

न चढ़ाएं दही और चीनी : माना जाता है कि ये दोनों चीजें धरती से जुड़ी से नहीं होती हैं और इन्हें एक प्रोसेस द्वारा बनाया जाता है। 

ऐसे में पारद शिवलिंग पर दही और चीनी नहीं अर्पित करना चाहिए।


पारद शिवलिंग का आध्यात्मिक महत्व :

श्री लिंगपुराण और श्री महाशिवपुराण में शिवलिंग को सृष्टि के मूल कारण का प्रतीक बताया गया है। 

शिवलिंग में संपूर्ण ब्रह्मांड की चेतना का निवास माना जाता है। 

पारद शिवलिंग उस चेतना का विशेष प्रतीक माना जाता है, जिसे साधक अपनी श्रद्धा और उपासना से जागृत करता है।

शिव की उपासना का मूल उद्देश्य केवल भौतिक सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, वैराग्य, विवेक और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होना है। 

इस लिए पारद शिवलिंग की पूजा का सर्वोच्च फल भगवान शिव की कृपा एवं आत्मिक उन्नति माना गया है।


पारद शिवलिंग सरल पूजा विधि :

मान्यता है की घर में पारद शिवलिंग की पूजा के समय उन्हें जल, दूध और गंगाजल अर्पित करना चाहिए।

संभव हो तो बेलपत्र और सफेद रंग के ताजे पुष्प शिवलिंग पर जरूर अर्पित करें क्योंकि, बेलपत्र शिवजी को अत्यंत प्रिय है।

पूजा के दौरान शिवलिंग पर चंदन अर्पित करना भी शुभ फलदायी माना जाता है।

जल, पुष्प आदि अर्पित करने के बाद शिवलिंग के सामने एक दीपक अवश्य जलाएं।

भगवान शिव के मंत्र 'ओम नमः शिवाय' का जप करें। 

ऐसा करने से शिवजी की कृपा प्राप्त हो सकती है।

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जन्मकुंडली के अनुसार पारद शिवलिंग पूजन :

वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह मनुष्य के जीवन पर विशेष प्रभाव डालता है। 

शिवपूजन को विशेष रूप से चंद्रमा, सूर्य, शनि, राहु, केतु तथा मंगल से जुड़े कष्टों की शांति हेतु शुभ माना गया है।

यदि जन्मकुंडली में चंद्रमा कमजोर हो तो सोमवार को शिवलिंग पर कच्चे दूध और जल का अभिषेक करना लाभकारी माना जाता है।

यदि सूर्य पीड़ित हो तो तांबे के पात्र से जल अर्पित कर आदित्य एवं शिव का स्मरण करना शुभ माना गया है।

यदि मंगल अशुभ फल दे रहा हो तो लाल चंदन, बिल्वपत्र और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप विशेष लाभकारी माना जाता है।

यदि शनि, राहु या केतु से जीवन में बाधाएं अनुभव हों तो महामृत्युंजय मंत्र का जप एवं शिवाभिषेक धार्मिक परंपराओं में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

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पूजा के बाद इन बातों का रखें ध्यान :

शिवजी की विधिपूर्वक पूजा करने के बाद कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। 

शिवलिंग पर जल हमेशा धीरे और श्रद्धापूर्वक चढ़ाना चाहिए। 

बाद में इस जल को किसी पौधे की मिट्टी में डाल देना चाहिए। 

कभी भी किसी दूषित जगह पर जल न डालें। 

अगर आप पारद शिवलिंग इस सावन घर ला रहे हैं, तो इन नियमों का ध्यान जरूर रखें और साथ ही, नियमित शिवलिंग की विधि पूर्वक पूजा करें। 

माना जाता है कि ऐसा करने से शिवजी की कृपा परिवार के सदस्यों पर बनी रहती है।

प्रश्नकुंडली के अनुसार महत्व :

जब किसी व्यक्ति के जीवन में अचानक संकट, रोग, व्यापार में बाधा, विवाह में विलंब, मानसिक अशांति अथवा निर्णय संबंधी भ्रम उत्पन्न हो, तब प्रश्नकुंडली के आधार पर योग्य ज्योतिषाचार्य ग्रहों की स्थिति देखकर शिव उपासना, रुद्राभिषेक अथवा महामृत्युंजय जप जैसे उपायों की सलाह दे सकते हैं। 

ऐसे उपाय श्रद्धा और सदाचार के साथ किए जाएं तो साधक को मानसिक बल और आध्यात्मिक स्थिरता प्राप्त होती है।

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गोचर ग्रहों के अनुसार पारद शिवलिंग पूजन :

जब गोचर में शनि, राहु, केतु या अन्य ग्रह चुनौतीपूर्ण स्थिति में हों, तब भगवान शिव का स्मरण विशेष शुभ माना जाता है।

साढ़ेसाती, ढैया, राहु - केतु गोचर, ग्रहणकाल के पश्चात, श्रावण मास, प्रदोष व्रत तथा महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर शिवपूजन का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।


पारद शिवलिंग पूजन की विधि :

प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन ग्रहण करें।

शिवलिंग को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।

गंगाजल से शुद्धि करें।

जल, दूध ( यदि परंपरा अनुसार करना चाहें ), पंचामृत, पुनः स्वच्छ जल से अभिषेक करें।

बिल्वपत्र, धतूरा, आक के पुष्प ( जहाँ परंपरा अनुसार स्वीकार्य हों ), सफेद पुष्प अर्पित करें।

चंदन, अक्षत एवं नैवेद्य अर्पित करें।

धूप एवं दीप प्रज्वलित करें।

"ॐ नमः शिवाय" तथा महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।

अंत में भगवान शिव से कल्याण की प्रार्थना करें।


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  • Original / Natural Narmadeshwar Shivling Full Set For Temple Puja }



पूजन के प्रमुख नियम:

शुद्ध एवं सात्त्विक जीवन अपनाएं।

पूजा के समय मन, वचन और कर्म की पवित्रता रखें।

शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर या केतकी का पुष्प अर्पित न करने की परंपरा अनेक शैव मतों में बताई गई है।

बासी पुष्प एवं दूषित सामग्री का उपयोग न करें।

बिल्वपत्र स्वच्छ एवं अखंड हों।

श्रद्धा और विनम्रता के साथ पूजा करें।

पारद शिवलिंग पूजन के आध्यात्मिक फल

भगवान शिव के प्रति भक्ति दृढ़ होती है।

मन में शांति और सकारात्मकता बढ़ती है।

ध्यान एवं साधना में स्थिरता आती है।

नकारात्मक विचारों में कमी आती है।

परिवार में धार्मिक वातावरण विकसित होता है।

आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा मिलती है।

धर्म, संयम और सदाचार का पालन करने की शक्ति प्राप्त होती है।

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ज्योतिषीय उपाय :

सूर्य अशुभ हो – प्रतिदिन शिवलिंग पर जल अर्पित करें।

चंद्र कमजोर हो – सोमवार को दूध मिश्रित जल से अभिषेक करें और "ॐ सोमेश्वराय नमः" का जप करें।

मंगल दोष हो – लाल चंदन एवं बिल्वपत्र अर्पित करें।

बुध अशुभ हो – हरे मूंग का दान कर शिव मंत्र का जप करें।

गुरु कमजोर हो – गुरुवार को पीले पुष्प अर्पित कर शिव-गुरु का स्मरण करें।

शुक्र अशुभ हो – सुगंधित पुष्प एवं सफेद नैवेद्य अर्पित करें।

शनि पीड़ा हो – महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जप करें।

राहु-केतु दोष – रुद्राभिषेक, शिव चालीसा एवं पंचाक्षरी मंत्र का नियमित जप करें।

विशेष पर्व :

श्रावण मास, महाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत, सोमवती अमावस्या तथा प्रत्येक सोमवार को पारद शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

वैदिक परंपरा, पुराणों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की उपासना मनुष्य को आत्मबल, संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देती है। 

पारद शिवलिंग की पूजा का महत्व विशेष रूप से श्रद्धा, शुद्ध आचरण और नियमित साधना में निहित है। 

जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली तथा गोचर ग्रहों के अनुसार योग्य विद्वान के मार्गदर्शन में किए गए शिवोपासना संबंधी उपाय साधक को मानसिक शांति और धर्ममार्ग पर स्थिर रहने की प्रेरणा देते हैं।

हर हर महादेव।

ॐ नमः शिवाय। 🙏🌸

हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!! 

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🙏हर हर महादेव हर...!!

जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -

श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय

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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....

जय द्वारकाधीश....

जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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