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Monday, October 27, 2025

मुक्ति मिलेगी :

मुक्ति मिलेगी :

श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्रविद्या, श्री खगोलशास्त्रविद्या, श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री विष्णु पुराण, श्री गरुड़ पुराण एवं श्री व्रतकथा अनुसार जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली से मुक्ति प्रदान करने वाले व्रत-पूजन का महत्व, नियम, फल एवं उपाय  

श्री आदि शंकराचार्य ने कहते हैं कि कुरुते गंगासागर आगमनम व्रतपरिपालनमथवा दानम् नवीन है सर्वमतेन मुभे जतिन जन्म शती ई है...! 

इस का अर्थ में आपको सुनाना चाहता हूं बताना चाहता हूं आज भजो गोविंद धन से दोस्त लोग हैं...! 

मैं आपको में बताना चाहता हूं उसमें से एक है कि कुरुते गंगासागर गमनम व्रतपरिपालनमथवा दानम् दिन विहीन है...! 

असल मुद्दा जतिन जान सकते हैं है...! 
यानी कुर्ते गंगासागर गम हम गंगा मैया के पास जाते हैं...! 
सागर संगम करते हैं पुण्य पाने का खोज में है....! 
जो किया लेते हैं पानी में समंदर में दरिया में नदिया में ऐसा कुछ भी होने वाला नहीं है...! 
के कुर्ते गंगासागर गमनम व्रतपरिपालनमथवा दानम् ढेर सारे व्रत करते रहते हैं...! 
कि मुझे नहीं मालूम यह मध्य प्रदेश में यह चीज में कैसे होते हैं....! 
आंध्र प्रदेश में तो डेट सारे होते हैं कि सचिन वृत्त बोलते हैं...! 
वह लक्ष्मी प्रसन्न होते न जाने क्या क्या क्या क्या क्या क्या क्या है...! 
कि कुछ भी कुछ भी नहीं होने वाला ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है...! 
कि ऐसा मेरा भाषण नहीं है आदि शंकराचार्य का भाषण जो सच्चाई है...! 
के कुर्ते गंगासागर गमनम व्रतपरिपालनमथवा दानम् कितना विद्वान दीजिए....! 
गोदान गोदान अन्नदान धन धन वस्त्र दान कि कुछ भी करिए आप कि कुछ भी मिलने वाला नहीं आपको तो से मुक्ति नहीं मिलेगी....! 





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सनातन धर्म में व्रत और पूजन केवल धार्मिक परंपराएँ नहीं हैं, बल्कि आत्मशुद्धि, कर्मों की शुद्धि और ईश्वर से जुड़ने का दिव्य माध्यम माने गए हैं। 

श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री विष्णु पुराण, श्री गरुड़ पुराण तथा व्रतकथाओं में अनेक ऐसे व्रतों का वर्णन मिलता है, जिनका श्रद्धा और नियमपूर्वक पालन करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति, जीवन में सुख-समृद्धि तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

के कुर्ते गंगासागर गमन व्रतपरिपालनमथवा दानम् ध्यान अभिनव शर्मा ओं हां साले के सारे मजहबों में ऐसा कहा गया है...! 

ऐसा है बताया गया कि जिसके बाद जांच नहीं होती है मुकीम भाई जतिन जन्मशती इन सातों जन्म में मुक्ति नहीं पा एक आया लिए हमें चाहिए...! 

ज्ञान और वैशेषिक दर्शन में कि कपिल महामुने में एक बार मिला दी जी के नुक्ते ही ध्यान से ही मुक्ति मिलती है....! 

मैं इसी को विस्तार रूप से आदि शंकराचार्य ने बताया है अरे बाबा आप गंगा मैया के पास जाएंगे...! 

वैदिक ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जन्मकुंडली और प्रश्नकुंडली यह संकेत देती हैं कि किसी व्यक्ति के जीवन में कौन-से ग्रह, कौन-से कर्म और कौन-सी बाधाएँ उसके आध्यात्मिक मार्ग में रुकावट बन रही हैं। 

जब ज्योतिषीय संकेतों के अनुरूप उचित व्रत, दान, जप और पूजन किया जाता है, तब ग्रहों की प्रतिकूलता में कमी आने लगती है तथा शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

डुबकी लगाएंगे हिमालय बांधेंगे अमरावती भागेंगे तिरुपति भागेंगे सागर संगम करेंगे...! 

स्नान करेंगे ढेर सारे व्रत का पालन करेंगे 2 गोदान गोदान सब कुछ करेंगे कुछ भी नहीं होने वाला है...! 

कि पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया मत लेना मुक्तिबोध अजय जन्मशती मना आपको आत्मज्ञान चाहिए तिरुपति जाएंगे तो आत्म नहीं मिलेगी कि गंगा मैया में डुबकी लगाएंगे...! 

तो मुक्ति नहीं मिलेगी अच्छा ठीक है है तो फिर क्या करें अब है....! 

जन्मकुंडली और प्रश्नकुंडली का महत्व :

जन्मकुंडली मनुष्य के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति का दर्पण होती है। 

इस से पूर्वजन्म के कर्म, वर्तमान जीवन की चुनौतियाँ तथा आध्यात्मिक उन्नति की संभावनाएँ समझी जाती हैं। 

प्रश्नकुंडली उस समय बनाई जाती है जब व्यक्ति किसी विशेष प्रश्न के साथ ज्योतिषी पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया के पास पहुँचता है।

यदि प्रश्न मुक्ति, पितृदोष, ग्रहदोष, रोग, आर्थिक संकट या आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा हो, तो प्रश्नकुंडली भी अत्यंत प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करती है।

यदि कुंडली में नवम भाव, द्वादश भाव, पंचम भाव, गुरु, चंद्र तथा केतु शुभ स्थिति में हों, तो व्यक्ति का झुकाव भक्ति, साधना और मोक्ष की ओर रहता है। 

वहीं यदि राहु, शनि, मंगल या अन्य ग्रह दोष उत्पन्न करें, तो व्रत एवं पूजन के माध्यम से उनके अशुभ प्रभावों को कम करने का प्रयास किया जाता है।

अरे बाबा मुक्ति कैसे मिलेगी हां ठीक है गंगा माई के पास नहीं जाएंगे गोदावरी नहीं जाएंगे नर्मदा नहीं जाएंगे तो त्रिस्तान नहीं जाएंगे...! 

नर्मदा का स्तोत्र स्थान गंगोत्री नहीं जाएंगे यमुनोत्री नहीं जाएंगे गोदावरी का स्तोत्र से नासिक नहीं जाएंगे कुछ कुछ भी व्रत नहीं करेंगे दान नहीं देंगे...! 

क्योंकि नहीं मिलने वाला है तो हम क्यों करें ठीक है फिर क्या करें अब से कैसे मुक्ति पायेंगे अब है...! 

और एक बार पर जाकर क्लॉक ऑफ सुनिए कि कुरुते गंगासागर गांव नम्रता परिपालन मथुर वाव दिन था...! 

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मुक्ति प्रदान करने वाले प्रमुख व्रत :

सनातन परंपरा में अनेक व्रत ऐसे बताए गए हैं जो आत्मिक शुद्धि और भगवान की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बनते हैं।

एकादशी व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। 

यह व्रत मन, बुद्धि और आत्मा को पवित्र करता है तथा पापों का नाश करने वाला माना जाता है।

प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ साधन है। 

इस से मानसिक शांति, रोगों से राहत तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।

पूर्णिमा एवं अमावस्या व्रत पितरों की शांति, मन की स्थिरता तथा शुभ कर्मों की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

सत्यनारायण व्रत परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कराने वाला माना गया है।

हरिवासर एवं विष्णु पूजन आत्मिक उन्नति तथा ईश्वर के प्रति भक्ति को दृढ़ करने वाले माने गए हैं।

विहीन हर्ष शर्मा मदेरणा मुभे जतिन अधिक मेहनत भज गोविंदम भज गोविंदम गोविंदम भज सही मोहम्मद ज्ञानेंद्रिय गोविंदा का 25 इंद्र में पांच इंद्रियों को जो राजा है...!

है जो पालन करता है गोपाल गोविंदम गठिया आत्मा आत्मा इस गोविंदा गो इस प्रयास कि गोपाल यानी कि जो इंडिया हिंदी ऊपर काबू में लाने वाला गोपाल गोपाल यानि जो भी काबुल में भी नहीं लाए...! 
इंद्रियों के वश में है यह गोकुलवासी है कि गोपाल योनि जो इंद्रियों को वश में ले लिया है...! 
कुछ समझ में गोवर्धन गिरिराज ने इंद्र को इतना विस्तार रूप से पा लिया है यानी दूर का भी देखता है...! 
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दूर की सुनता है दूर का भी ग्रहण करता है नश्वर संसार प्रशिक्षण यदि गोवर्धन गिरिधारी अ कि यह कोई पहाड़ नहीं है...! 
उंगली में पहन यह सब कथाएं हैं कि जो लोग कथाएं के पीछे पड़ते हैं...! 
ना कि उनका जिंदगी एक हंसी मजाक हो जाए तो और मैं नहीं चाहता हूं...! 
इतने ढेर सारे संत होते हुए भारत भूमि में आदि शंकराचार्य के जैसे बुद्ध इसे कभी के जज महावीर के जैसे संत ज्ञान देव के इसे आपका इतने लोग होते हुए भी आपका जिंदगी अंधकारमय क्यों है...! 
कि आप भी कभी जी के जैसे क्यों नहीं बनी और तक आप भी वर्धमान महावीर जी के जैसे गौतम बुद्ध के लिए से क्यों नहीं बने थे है....! 
इस लिए नहीं बनेगी आपके आपके अंदर चाहत नहीं है क्षमता है चाहत नहीं है....! 
की क्षमता हर एक के पास स्थित तेंदुलकर बनने के लिए है भीमसेन जोशी बनने के लिए तय हुआ था...! 
महात्मा गांधी जी बनने के लिए है या फिर भी कुछ भी नहीं बने हैं...! 
क्योंकि नहीं चाहत चाहत चाहत नहीं है हैं जितना चाहे उतना पावर जैसा चाहा वैसा पावर मैं खाद की कंपनी में काम करते हुए क्यों नहीं चाहा आत्मज्ञान को और मैं पाया खरीदना है...! 
जो मेरे साथ ढेर सारे कंपनी में काम कोई भी नहीं चाहा वही भी नहीं पाया है...! 
क्यों नहीं चाहेंगे तो कैसे हैं पाएंगे आप भला चाहेंगे तो कैसा नहीं पाएंगे आज का दिन मैं अपने आप को चाहा और मैं देखकर डिलीट कर लोग ध्यान करेंगे मेरे द्वारा ऐसा मैं चाहा तो ऐसा ही होता है...!
क्यों नहीं है है जैसा चाहती है...! 
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व्रत-पूजन से मिलने वाले फल :

नियमपूर्वक किए गए व्रत और पूजन से मानसिक शांति प्राप्त होती है।
ग्रहों की प्रतिकूलता में कमी आने का विश्वास किया जाता है।
परिवार में प्रेम, सुख और सौहार्द बढ़ता है।
रोगों से लड़ने की मानसिक शक्ति विकसित होती है।
धन, यश और सम्मान में वृद्धि के अवसर प्राप्त होते हैं।
संतान, शिक्षा और वैवाहिक जीवन में शुभता बढ़ती है।
आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर के प्रति श्रद्धा दृढ़ होती है।
यदि कुंडली में गुरु कमजोर हो तो गुरुवार का व्रत तथा भगवान विष्णु की उपासना लाभकारी मानी जाती है।
यदि चंद्र पीड़ित हो तो सोमवार का व्रत तथा भगवान शिव की आराधना शुभ मानी जाती है।
यदि शनि कष्ट दे रहा हो तो शनिवार को शनि देव की पूजा, पीपल सेवा तथा दान करना उपयोगी माना जाता है।
यदि राहु-केतु के कारण बाधाएँ हों तो महामृत्युंजय मंत्र का जप, शिवपूजन तथा नागदेवता की श्रद्धापूर्वक आराधना लाभकारी मानी जाती है।

गरुड़ पुराण के अनुसार मुक्ति का मार्ग :

गरुड़ पुराण में कहा गया है कि मनुष्य के कर्म ही उसके भविष्य का निर्माण करते हैं। 
जो व्यक्ति सत्य, दया, धर्म, दान और भगवान के नाम का स्मरण करता है, उसके पाप धीरे-धीरे क्षीण होते हैं। 
नियमित व्रत, जप, तप, दान और ईश्वर भक्ति से आत्मा शुद्ध होती है और मोक्ष का मार्ग सरल बनता है।
वैसा पावत बचपन में ही आदि शंकराचार्य ने आत्मज्ञान को चाहा तो पाया हम क्या कहें रिटेल हो गई है...! 
फिर भी नहीं चाहते हैं कि स्वामी जी ने अभी किए हैं दो रास्ते हैं को यूं ही देना है...! 
ओ कान्हा पीना सोना खाना-पीना सोना और दूसरा दस्ता है...! 
एक आदि शंकराचार्य का बताओ बताया हुआ एक कबीर जी का बताया हुआ है...! 
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पितरों के प्रति श्रद्धा, तर्पण, ब्राह्मण सेवा, गौसेवा तथा जरूरतमंदों की सहायता भी शुभ कर्मों में गिने गए हैं। ऐसे कार्य जीवन में पुण्य की वृद्धि करते हैं।

विष्णु पुराण का संदेश :

विष्णु पुराण में भगवान विष्णु की भक्ति को सर्वोच्च बताया गया है। 
इसमें वर्णित है कि जो व्यक्ति श्रद्धा, विश्वास और निष्काम भाव से भगवान का स्मरण करता है, उसके जीवन के अनेक कष्ट दूर होने लगते हैं। 
भगवान के नाम का जप मन को स्थिर करता है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
कि यह तो पशु का मार्ग है दोस्तों पशुपति का मार्ग है 12 ही दो रास्ते थे कि पशु का मार्क टांग पीना सोना एक पत्नी दो बच्चे हैं...! 
कि खेल खत्म कि पशु पक्षी का मार्ग है आप जो चाहते हैं वे सभी लोग पाल यह है...! 
जो नहीं चाहिए आपको ओट्स जोन ट्वीट अ थे वर्ड यू वांट any1 ए वेरी सिंपल एंड टू यू माय डियर फ्रेंड्स आएगा...! 
साहब बयान देंगे और कुछ नया नहीं समझ पाये बने जॉइंट कंपनी की बस में सीनियर कि नहीं...! 
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इस समय फाइल स्वामी जी नमस्कार बहुत सालों के ऑफिस पर आपको देख रहा हूं मैं मुझे बहुत अच्छा लग रहा है...! 
हमारे बॉस के लिए जोरदार तालियां बजाएंगे आप सभी लोग अ कि अ कि हमारे कंपनी बहुत अच्छा था...! 
वेरी वेरी ब्यूटीफुल कंपनी रूटीन वर्क एवरीथिंग वास वंडरफुल वर्क इंटरकंपनी गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन जॉइंट कंपनी कंपनी ने गांव - गांव शहर - शहर है कि देश और विदेश दोनों चीज लेकर एक तो अजीब सा का में एक आंदोलन दूसरा ध्यान का एक आंदोलन तीसरा पिरामिड का यह तीसरा आंदोलन हर आदमी बनना चाहिए....! 
जो लोग मांस की कुछ भी नहीं है जो पहली बात है मांस मांस को छोड़ना चाहिए यहां कितने लोग हैं...! 
जो मास्क थोड़ा पढ़ कर बताओ मैं भी देखूं देखूं बताइए ना ए 1 12345 ए वेरी गुड ओनली फोर पीपल जालियां जाएंगे दूसरे का हृदय रोगों के है हुआ है....! 
जो पहली बात है इफ यू वांट पीस आफ माइंड आईएफ ई वांट हेल्प बॉडी फ्रॉम इंटेलिजेंस यूनिट फ्रेंड्स मै डिफरेंट यह ट्वीट वेजीटेरियन है...!
कि Bigg Boss विदाउट सेइंग ई में दो ही लोग छलांग लेनी पड़ती हमें आध्यात्मिकता का नशा की संगत पर आध्यात्मिक विद्या में पहला तो शाकाहारी बने दूसरा तो ध्वनि बने हैं...! 
का पहला चालान है तो अधिकरण मां चम्मच को छोड़े कोई पशु को नहीं खाएं कोई पक्षी को कोई मार्च को मैं हूं और दूसरी छलांग है....! 
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आंखें बंद कर लेना और अपने ही विश्वास विश्वास के साथ एक हो जाने का देखे 24 घंटे हैं एक घंटा दो घंटा तीन घंटा अपने डांस के लिए ए रिजल्ट सोम टाइम एवरी डे फॉर इन्विटेशन आफ बर्थ डे है...! 
तो यह गंगा के में डुबकी लगाने का सागर संगम करने का पुण्य वे सब बातें हैं...!
कि यह रोने के बातें यह थे बुद्ध इन के खिलाफ लड़े थे में महमद ने इनके खिलाफ लड़े थे है....! 
क्योंकि इनके खिलाफ लड़ना है कि पिरामिड स्पिरिचुअल 64 मोमेंट कारी एक मात्र लक्ष्य जी हां गंगा में स्नान करेंगे गोदावरी नर्मदा में कोई फर्क नहीं अंतर नहीं है....! 
में प्रवेश करेंगे तो कि पल्स अगर आप सोचेंगे कि हमें मुक्ति मिल जाएगा बिल्कुल गलत यो यो स्टुपिड ईयर्स ए प्लेस इन योर स्टूपिड ई ए फ्रेंड एजुकेटेड पीपल ओं कौन - कौन इस ट्वीट है...! 
तो कुर्ते गंगासागर धाम नम्रता परिपालन मतवाद जनम ना विहीन अधीन रिसर्च कि हुसैन अ थे रीजन हीरो पीय धम्मो स्कूल मार्कशीट पिंपल्स पेट में एसिड फ्रेंड्स है...! 
और यह जो यह जादू के जैसा है हां हां झूम जाएंगे हरे राम हरे कृष्ण कुछ भी होने वाला नहीं है...! 
कि मैं भी हिंदुस्तान का हो मैं भी ब्राह्मण का लड़का हूं मैं सब कुछ जानता हूं है जो आप जानते हैं मैं जानता हूं परंतु जो मैं जानता हूं आप नहीं जानते हैं मैं हूं है जितना राम है...! 
ना बड़ा बाद आप पड़े में उसे ज्यादा नहीं पड़ा मैं सारे उपनिषद परम ब्रह्म मुहूर्त बाइबिल कुरान चाइनीस राष्ट्रीय रोजगार बाहर आ मैं हूं की पत्नी के भेज दो बच्चे हैं...! 
संसार में रहता हूं परंतु एक भी बेकार बात नहीं करता हूं पल भर भी मैं व्रत नहीं करवाता हूं...! 
मैं कि मैं एक ऋषि बन गया हूं मेरे सारे पिछले जन्म में देख लिया हूं...! 
मेरे पत्नी देख चुके मेरे बच्चे हां देख नहीं देखेंगे अ है अरे बाबा की साधना करेंगे...! 
किस का गला नहीं के लिए काया और के खतरे का या पिंपल नहीं है कि आसमान से टपके का नहीं कुछ भी अ आप जो चाहते हैं वह पाते हैं मैं संगीत चाहा था मैं तुम्हें पाया है का सुझाव हुआ है...! 
ऑन कर दो ए टॉपिक हुआ है घर पे की तूती क्यों क्यों नहीं पान बताइए जिसके पास क्षमता नहीं है भीमसेन जोशी के जज बनने का के अल्बर्ट आइंस्टीन के जैसे बनने का को चमकदार किसके पास नहीं है...! 
इस समय किसके पास नहीं है समय है क्षमता है बुद्धि नहीं है चाहत नहीं हम उचित मार्ग में नहीं जाना चाहते हैं मैं हूं कि क्या शोभा देती है....! 
कि हमें भी आदि शंकराचार्य के जैसे बनना ही है कम नहीं चलता आ आ को शोभा नहीं देती अच्छा ठीक है गंगा मैया के पास नहीं जाने के लिए कह रहे हैं हम नहीं जाएंगे सागर के पास नहीं जाने के लिए कह रहे हैं आप आदि शंकराचार्य नॉब या गांव में हुआ है....! 
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अच्छा ठीक है व्रत नहीं करेंगे डेट चाहिए व्रत ठीक है ध्यान नहीं देंगे नोबिता नोबिता नोबिता अनुसार कुछ भी नहीं देंगे तो क्या करें हम स्वामी जी ने बताया था....! 
कि प्राणायामं प्रत्याहारं नित्य यह नीचे विवेक अभिचार कर्म जाप्यसमेत समाधि विधानं उज्जयंत महल रावण भज गोविंदम क्या करना है....! 
में करोड़पति बन गई है बी बी बी क्यों क्या बात है कि स्वामी जी ने मार्ग बताएं मैं तो उसी मार्ग में चलने वाला आदमी हो चलाने वाला आदमी इस प्राणायाम अ अ में एक बार झूठ यह सब लोग हैं....! 
ए वेरी गुड अरोमा फास्टिंग सेकेंड तक प्रति यह अ कि थर्ड नित्यानंद शब्द कि विवेक आप है यानी तीन चीज की चिकन हुई है प्राणायाम का प्रत्याहार का एवं नित्या नित्य विवेक विचारम् हम इन चीजों को देखेंगे कर दो को सबसे पहले प्राणायाम क्या चीज होती है....! 
प्राणायाम प्राणायाम यह सांसदों के साथ संबंधित में शनि के अंगों से संबंधित है उसे करके आसन उंगलियों के समय पर के मुद्रा इसे करते मुद्रा अ कि ऐसा कहो ऐसा कहो ऐसा कहो कुछ भी कहो उंगलियों से उसे करते हैं...! 
मुद्रा में चीनी शासन करो मयूरासन कूड़ासन यह सब शरीर के अंगों से संबंधित परंतु प्राणायाम केवल शान से संबंधित नहीं शरीर के विभिन्न अंगों से उंगलियों के कि सांसदों के साथ कुछ कॉल करना है....! 
उसे कहते हैं प्राणायाम अ में दो तरह के प्राणायाम है एक तो हत्या योग प्राणायाम दूसरी बातें राज योग व प्राणायाम कहते हैं प्राणायाम ने जबरदस्ती करने जैसा है हुआ है....! 
मैं जबर्दस्ती पूरक करना जबरदस्ती रेचक करना जबरदस्ती कुंभ करना है इत्यादि मूरख चेष्टाएं है कि विपक्ष सहित चेस्ट आएं हैं मैं हूं आप जैसा कोई जानवर नहीं करता ऐसा यह इंसान का जानवर करता समझता है अपने आपको मैं को चालू हालांकि बहुत बेवकूफ है....! 
यह इंसान का जानवर है कि भूख नहीं है फिर भी कहते हैं यह खाते ही रहता है यह इंसान का जानवर कोई जानवर ऐसा नहीं आता है तब है क्या है....! 
कि एक लाइन के सामने आ मैं एक बकरी भी हो उसके पास भूख नहीं तो कल देगी नहीं करेगा पन तो हम कि मानव का जन्म लेते हुए हम बकरी को करें हैं....! 
आज शाम को खा रहे मेंढक को खा रहे हैं कि क्या मानव जाति का शोभा है और गंगा में का पाचन कि देने के लिए उनके पास जाएंगे व्रत दान करें चिकन मटन खाते हुए हैं हुआ है...! 
ए मेरे प्यारे दोस्तों अगर आपको मुक्ति चाहिए तो सांस के पास जाइए उसका नाम है प्राणायाम हटा योग प्राणायम नहीं बल्कि सुखमय प्रणब राज योग प्राणायाम राज्य में उसे उसी पानी में तो उसने कहा जाता है कहा जाता है....! 
बिल्कुल साफ है को समझने वाले समझ गए ना समझे वह अनाड़ी है फिल्म गाना अको समझने वाले समझ गए हैं....! 
ना समझे ना समझे वह अनाड़ी है बचपन में सुनी अर कि शंकर चलिए बताइए बुध बताइए सभी लोग बताइए फिर भी हम अनाड़ी हैं....! 
कबीर जी बनाएं बताएं क्या करें तो शाकाहारी बने दूसरे के साथ जाना है...! 
यह दो चीज अपने पास है मन और सोंग्स इन दोनों का मिलन हो जाना है...! 
ओम श्री और पुरुष का मिलन होता है तो समाचार घटती है मन और चांस का मिलन होती है तो निर्माण करती है....! 
ए वेरी सिंपल कि बिना स्त्री और पुरुष का संचार होती क्या अध्यक्ष है अकेला पूरी से संचार होता है क्या नहीं मिलन तो चाहिए मिलन का नाम है योग योग योग योग का अर्थ है मिलन है...!
यह दो चीज ए प्लस बी मिलते हैं तो शिव रेड्डी आते हैं प्लस का मिलन नहीं होता तो सिर्फ मिट्टी का जन्म नहीं होता है कि यह प्लस भी आने दे हैंड्स फ्री और पुलिस सी प्लस दिए बच्चा एक बच्चे को का जन्म होते हैं यह प्रिया ने मन और चांस जन्म होता है....! 
एक दिव्य चक्षु झाल और ज्ञान चक्षु का दो चक्रों आते हैं कि विवेचक शिशु का जन्म सिद्ध यंत्रों का जन्म आधी यह प्लस बी इज इक्वल डिसीप्लस वह तो चक्षु आते हैं....! 
हालांकि कुंओं में और सब कहिए चर्मचक्षु मैं मनोज चक्षु दिव्य चक्षु ध्यान शिक्षक चार व्यक्ति अगर यह बंद हो गए हैं....!






हेलो हेलो कोई है क्या इधर मुझे कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है घ्र क्योंकि मेरे कि अंकों में अंधकार है कि जैसे ही मैं आकर खुद या हर इतने लोग आए हैं....! 

यह चमत्कार की बातें हैं कि यह है चमचों दूसरा लेमन और चक्षु यानि मेरी मां गुजर गई 10 साल हो गए फिर भी मैं आंखें बंद करूं और मेरी मां को सामने ला सकता है....! 

कि जो जो जो जो घटा मेरे जीवन में टॉप कोरोमंडल का जीवन शॉप मेरे सामने आ जाए कैसा - कैसा मैं रायपुर दुर्ग व रायपुर दुर्ग - भिलाई इंजेक्शन कितने गांव में गया...! 

क्योंकि जो मैं जिंदगी में घटी मेरे मन में भी कि कितने सकता है...!
कि पंचमंदिर चुप चुप के लिए जेल में बंद करना पड़ता है....! 

कि ऐसा नहीं होता पल चम्मच बनकर तो फिर मेरे को मिला कर सकता आपको आपके मां को में नहीं जा सके कि देखा नहीं कि मैं जो आपको चार मैचों से नहीं देखे हैं...! 

वह समझ में नहीं आ सकते मैं टाल देता हूं एनीटाइम इन जैसलमेर सैनिकों ने ताजमहल को कि हनी सिंह चौधरी मनोज चक्षु और तीसरा है....! 

मलिक पाने के लिए चर्मचक्षु बंद करना ही पड़ता तभी दे तभी तो आप अच्छे अच्छी तरह मनोज चक्षु में आप सब कुछ देख सकते हैं है...! 
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जो बीत गया और अतिशीघ्र दिव्य चक्षु प्योर यहां होता है और सुदर्शन चक्र है...!

कि गुरु चक्र है हां कहिए मिला था कि स्वादिष्ठान मणिपुर चक्र अनाहत विशुद्ध आज्ञा चक्र चक्र चक्र की स्थिति सात चक्र चक्र चक्र अंतिम चक्र है यह गुरु गुरु चक्र चक्र सुदर्शन चक्र यह आप अ मैं आपकी मां गुजर गई थी...! 

कि आपके पिता गुजर गए अभी किधर है किस दुनिया में है कि आप यहां बैठकर देख सकते हैं...! 

की गति दिव्य चक्षु जैसे संजय ने महाभारत में दूसरा आपके पास होते हुए पूरा महाभारत युद्ध का वर्णन किया है...! 
कि उसे करते हैं दिव्य चक्षु मनुष्य को पाने के लिए चमक को बंद करना पड़ता और के लिए और बंद कर दो कि जब मन को निर्मल करते हैं अहैं तो बीवी चुका एक महान आविष्कार हो जाएगी और और किसी के पास दिव्य चक्षु का अविष्कार हो गई उसे करें...! 

ऋषि में योगी अपने मन को काबू कर लिया मन को शुरू कर दिया मन अधिकतम कर दिया तो योगी एक दृश्य का आविर्भाव हो गई तो ऋषि उसके बाद है...! 

114 चक्षु आएगा ज्ञान चक्षु अ और यिंग यांग के बाद जो मिलता है तीसरी आंख के बाद जो मिलता है...! 

वह चौंक है 134 अंकों ज्यादा करने के लिए आपको बुक पढ़ ली है...! 
यह ड्रॉप स्वाध्याय करना है सज्जन संगठित करना है ध्यान करना है ध्यान से तीसरी पाते हैं पानी के लिए स्वाध्याय एवं सत्य संगत मैं इतनी सारी ध्यान किए हैं उनका अनुभव सुनना है...! 

इतनी लाखों लोग लिखे हैं उनका लिख-लिख जैन ग्रेट विजडम ओं कि आयुर्वेद मोर थन 5000 मास्टर्स-1000 रिसेंट जॉब्स अट लीस्ट 10 मिलियन इससे एक्सपीरियंस फॉर पीपल विद सिमिलर तो मेरे पास कितना बड़ा ज्ञान का भंडार होगा....! 

तालियां बजाएंगे तो आ जाओ ना कि अगर मई खसरा का तो आप क्योंकि कर सकते हैं....! 

मैं बांसुरी बजा सकता हूं आप नहीं बजा सकते हैं कोई भी व जा सकता है 3 चीज चाहिए तमन्ना तरीका प्रयास करना चाहिए तो फिर बाद एक तरीका सीखना चाहिए फिर बाद में रिवर्स करना है...! 
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एक पिंच गढ तमन्ना तरीका प्रयास कि दैवी शक्तियों का ज्ञान चक्षु का तमन्ना चाहिए तरीका सीखना तरीका स्वामी ने बताए शंकराचार्य ने प्राणायामं प्रत्याहारं नित्य नीचे विवेक अवचत अलार्म समेत तमाम मुद्दों का समाधान समिति ने जो विधान राघवा प्राणायाम है...! 
यह दो तरीके होते मुझसे और ब्राह्मण से पेन में डालेंगे इडली डोसा डालेंगे तो और अन्य जाएगी पसंद हो जाएगी और हमें ऊर्जा मिलेगी अ कि इडली वड़ा का दूसरा का कोई जरूरत नहीं है....! 
ना ही आप हल्का जान करिए यहां यह ब्रह्म कमल विकसित होगी जब मंजूर हो जाती है...! 
ऊपर से डायरेक्टर ऊर्जा का या उसे करते हैं ! 
हुआ है के प्रति मिश्रा अपोजिट प्रत्यर्थी दिल्ली डेयर डेविल्स वर्सेस में कोलकाता नाइटराइडर्स ने कि दोनों आपस में लड़ाई एक दूसरे के प्रतिद्वंदी है मुझे कल टेलर प्रत्याहार यहां से यह देना है जो पशु को कि पशु कहा जहां से पशुपति का हर यहां से है....! 
मैं यहां तक जाने के लिए बीच में मन है मन माइंड - 20th एनुअल लीव थिस वर्ल्ड व्हो विल ओपन ओं मैं तन मन बाहर दशम द्वार जाहिर और तन - मन बाहर द अहमद नव - नव धोइए 1 2 3 इंच प्लस 3 257 द्वविड़ पुणे देगी और वाला है...! 
यहां ब्रह्म कमल तंगी बाहर दशम द्वार ज़ाहिर और ब्रह्म कमल खिल जावे जानी बन जावे न जुदाई सजना वे व जुवे j100 के हो जावें तू आशिकी प्रेशर बींध शब्बीर व चले रे मने मन की शांति स्वस्थ ताण खुशियों को पाले बेब्स यह ने बंजारा गांव में बन जाएंगे बुने हुए...! 
दबंगई जोन में वे सांसद के हो जावै अर के दसवें द्वार से आहार को पाना इसी का नाम है प्रत्याहार है मैं हूं कि नींद की जरूरत नहीं है हां देने की जरूरत नहीं है लाखों लोग हिमालय पर्वत श्रेणी में लाखों लोग यूं ही जीते हैं...! 
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आप तो जानते हैं फिर हम अपना क्या हुआ हम इतने पीछे क्यों रह गए पशुओं के भारतीय कि जैसे हीरा प्राणायाम सांसद एकता पाते हैं....! 
मजबूर हो जाती है और यह ब्रह्म कमल खिल जाती है तो ऊपर से मिलता है घ्र को उर्जा इकट्ठा करें एक टीवी पाने के लिए कितने पैसे चाहिए स्वामी जी आजकल को 25 हजार में ₹10 लेकर आ कि मुझे टीवी चाहिए तो देगा क्या एक ₹10 में अ कि पैसे हैं....! 
पैसे तो पैसे नहीं आएगा कि भी अरे पैसे इकट्ठा करना पड़ता है...! 
कि श्रम है करके काम करके का पैसा इकट्ठा करेगा Data करें 25 हजार के स्वामी जी मुझे टीवी चाहिए कि नमस्कार हम आपका इंतजार है....! 
मुझे अ हूं तो जैसा कि हम ध्यान में पढ़ने बैठते हैं तो ₹1 का कमाई हुई ऊर्जा का प्रत्याहार से 40 दिन बैठे तो चलिए मेरा क्या ₹1000 का फिर भी चीन नहीं आएगा आ है....! 
अरे बाबा कि टीवी खरीदी है को 25 हजार रुपए लगेंगे यारियां 125 दिन 150 दिन अपने पिछले जन्मों के हिसाब - किताब से संबंधित ठीक है ना हुआ है....! 
कि प्राणायामं प्रत्याहारं नित्य नीचे विवेक अभिषेक नित्यानित्य विवेकविचारम् जैसे यह प्राणायाम द्वारा हत्या हो गई और rs.25000 गए हैं इकट्ठा किए हैं साल भर में हो गई तो आप अपने पिछले जन्म लेते हैं....! 
उसके अनुसार जैसे देखते हैं तो यह अ है और उसे साफ पहने मालूम हुआ था कि मैं यह शरीर नहीं हूं...! 
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मैं आत्मा हूं इसे कहते नित्यानित्य विवेक है...!

कि यह कोई अतिरिक्त बातें पुस्तक पढ़ें और चीनी का पति है प्रैक्टिस की बातें आदि शंकरा कोई पंडित नहीं है...! 

योग्य छोड़ते पंडित या धीरे पढ़ाने वाला भगवत गीता पड़ता है रखता है 700 श्लोक और सब को बताते हैं...! 

ऐसा ऐसा घृत आप जब मैं कुछ नहीं जानता मैं पंडित हूं...! 

कि मैं कभी जान तो किया ही नहीं फोन कहां हैं अध्ययन में तो जाने में तक पंडित हम केवल पंडित मणिपूरक चक्र मणिपुर मणिपुर के पंडित जी हैं....! 

तो चलिए कि इस बीच सब्जेक्ट है कि जब एक सब्जेक्ट एंड ग्रेट अमाउंट आफ रेडियस मैं हूं कि मैं बांसुरी अच्छा हजारों नहीं है कैसा है...! 

मेरा वॉइस अरे यह मानसून के आप पता कर सकते हैं मैं कितने अयस्क किया होगा हम एडिट कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहें कि अर्जुन आप और मैं अनेकानेक जन्म लिए हैं...! 

मैं तो सब कुछ जानता हूं तू उल्लू का पट्ठा है तू कुछ भी नहीं जानता है और बहू निवेदिता ने जन्मांतरों चार्ज न कार्य हम विद सलमान इतना तुम वितरण तपा क्या अंतर है....! 

भगवान श्रीकृष्ण ने बचपन से ही ध्यान का अभ्यास किए हैं कि उनके पिछले दस जन्म में कौशल में वह ध्यान किए थे....! 

कि भगवान श्री कृष्ण ने उनके पीछे स्थित दस सही में हरेक जन्म में कौशल जन्मदिन का व्यस्त फिर बाद में आए हैं...! 

और फिर भी गुरु का सहारा चाहिए संदीपन महाराज के पास गए साक्ष्यों के साथ जो विजय विधि सीखें और इस महान पुरुषोत्तम बन गए तो हम पीछे क्यों है....! 

अच्छा ठीक है पिछले दिनों में कम नहीं कुछ भी नहीं किए हैं आज से करेंगे तो कि आज से अपने आप को पकड़ लेंगे पशु का मार्ग छोड़े पशुपति कुमार को अपनाएं तालियां बजाएंगे तो ऐसे ही होगा....! 

ना कि अ कि बचपन में से ही ध्यान को अपनाना बुढ़ापे में क्या जन्म अपनाएंगे आप बुढ़ापे में क्या करेंगे आप कुछ भी नहीं करेंगे काल करे...! 

सो आज कर आज करे सो अब पल में प्रलय होएगी बहुरि करोगे कब आज काल करे सो आज कर आज करे सो अब पल में प्रलय होगा बहुरि करोगे कब है....! 

कि काले कह रही शुभा बाऊजी हां आज करे सो अब पल में प्रलय यह होगा बाहुक नो होंगे इस कबीर वे कब कभी राम कभी आइए रहा कबीरा सचिव कश्मीर व बालों की जिंदगी गुजर गई कुछ मांग बढ है...! 

अरे तो 20 साल के पहले क्यों नहीं आया था जो जान में नहीं आते ने हमेशा के लिए छोटे दूध मैंने जाते हैं वह बड़े हो आप बड़े अ के दुख में सुमिरन सब करे सुख मे है...! 

गणेश ना कोई सुख में सुमिरन अधिक कौन है को हो एक कबीर स्वामी की नियुक्तियां मुझे मेरा कुर्ता अच्छा लगा धन्यवाद स्वामी जी कि दादी बढ़ने से कोई स्वामी की बनेंगे मैं स्वामी नित्य - प्रभो आनंद में नाम बदनाम प्राणी पदार्थ हमें मेरा नाम सुभाष पत्र मेरे माता - पिता ने रखे थे....! 

उनको नमन करते हुए मैं नाम बदलने वाले में से नहीं ना ही वस्त्र बदलने वाले हैं अरे बाप को के बने हुए हैं....! 

तो आप के दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोई जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होय है है....! 

और तीसरा में सुन-सुनाकर हम ध्यान मग्न हो जाएंगे तीसरा है कभी जो को मेरा नमस्कार तालियां बजाएंगे कर चुके हैं....! 

का सरगना की करे से वाह निरुक्त फोन करो ना सगुण निर्गुण से अपनों सांय हमारा ध्यान कबीर कभी भी ऐड रघबीर गभ्भो दो कि करियर सेवा गाए हैं...! 

गाय का में की स्थिति का लगा हूं उसको कुछ पाया है क्या है कि चाहती क्या है कि उसका हां जूते वह जलकर मर जाएगी बिचारी अ एक फोन चलाओ पूर्ण चाहिए....! 

उसको डांस चाहिए अ लें गाय का पूजा नहीं गायिका सेवा माता पिता का पूजा नहीं माता - पिता का सेवा पहाड़ का पूजा ने पहाड़ का सेवक पहाड़ कैसे पता ही नहीं है.....! 

एक पहाड़ से बचाती है कोई मूर्ति है मूर्ति सेवक पूजा चाहिए सेवा सहित इससे वाहन अथवा हो जाए अरे बाबा कबीर को जानिए कबीर को पढ़िए अच्छे अंक करिए और नेक इंसान बनिए और पुरषोत्तम बनी है....! 

संत बनिए कि मांसाहार जिसे शाकाहारी आगे तो साधु बन गए हैं के अभियान को अपनाएंगे आत्मदान को पाएंगे तो संत बन गए हैं तो छलांग है...! 

एक साधु बनने का और संत बनने का अ हैं अक्षर गुणों की करें सेवा पूजा नहीं पूजा कदापि नहीं पूजा सेवा मैं निर्गुण कहां यह करोड़ रोजगार निर्गुण का करो जान जान इब सब कुछ जरूरी टैब्स इंस्टॉल सर्वभूतात्मा कोई अंतर नहीं है....! 

ही निर्भर है कि युवराज सिंह चैंपियन एस ए को अवोट इन लेक्स इन कंसिस्टेंसी कोटिंग एंटी हॉलीवुड 300 करोड़ घाघरे निर्गुण से हमारा यह ब्लॉग पोस्ट सब्सक्राइब करिए और यहां से देख रहे हैं....! 

उनको कुछ नहीं दिख रहा है परंतु दूसरे जगह घटना उसे घृणा हो गई थी अ ए मेडिटेशन ध्यान आज मैच कितने कि यमराज से पूछें मैं जानना चाहता हूं यह मरने के बाद क्या होता है तू बहुत छोटा है....! 

बड़े - बड़े बातें शोभा नहीं देते हैं कि छोटे छोटे मुंह बड़ी बात को मनाना चाहिए जाता है....! 

परंतु मनाया नहीं गया है है तो उसको बोलना ही पड़ा समझाने पड़ा यह बंद माउस चली छूने के बाद कहां जाता है तो दलित ध्यान ध्यान का मकसद है....! 

हम मानते जीवन को देखें कि मैं मेरे जहन में मैं सब कुछ देखा मेरे पत्नी देखी मेरे बच्चे हां देखे लाखों लोग देख जो लोग चाहेंगे इन लोगों को है कि जो लोग क्रिकेट चाहे सब लोग क्रिकेटर बने हैं....! 

जो लोग अपनी जान बचाने सभी लोग अपने धन उपाय नहीं चाहत नहिं पावत जितने चाहत चाहत चाहत इज द मैं इतना कहते हुए बहुत-बहुत शुक्रिया धन्यवाद सभी लोगों का हम अभी जानने बैठेंगे दोनों पांव क्रश कर लिया दोनों हाथ एक करिए कोई भी अंक नहीं बोलेंगे सांसद के साथ दोस्ती शुरुआत यानि प्राणायाम चुका है....! 
प्राणयाम हठयोगी परिणाम नहीं ध्यान योग व प्राणायाम है लिए कोई भी आगे नहीं खोलेंगे पंडित वह पावर अ कि ज्ञानी हो अध्ययन है....!
मैं यहां शंकर भगवान भी हो जैसे ही हम करते हैं आंखें बंद आंखें बंद कर लेता है को सबसे ज्यादा बंद झाले बंद करने वाला शंकर भगवान है तो हम क्यों पीछे हैं....! 
कि हम भी तीन आंखों वाले बनेंगे के बीचों को प्राप्ति करेंगे यह कैसा संभव विधान क्या है हां अपने उच्च व आत्मविश्वास के साथ एक हो जाइए कि यह कहीं एक अध्ययन विधान नाम है स्वास्थ्य अनुसंधान दो मालिक नहीं है....! 
कि भौतिक दुनिया देखने के लिए चर्मचक्षुओं झाल हाउ टो ओपन करना चाहिए में गुजरे हुए मां को देखने के लिए मनुष्य में चार मैचों को बंद करना चाहिए है और दिव्य चक्षु पाने के लिए कि दोनों चक्र बंद करना चाहिए मनोज चक्षु एवं चर्म चक्षु मुख्य सचिव को खत्म करने वाला जो विधि विधान है...! 
उसे प्राणायाम प्राणायाम है अ बेगम वन विच व्रत मे डियर फ्रेंड्स एंड मास्टर सिंह और साफ और अकि आज से एक नया जिंदगी को अपना है...! 
कि आपका प्रकाश आपसे ही उद्भव होती है...! 
आप से ही उत्पन्न होती आपसे ही अंकुरित होती है आप ही प्रकाश डालती है कि कोई भी दूसरा का सहायता नहीं कर सकता है...! 
इस क्षेत्र में हम पैसे दे सकते हैं ध्यान नहीं दे सकते हैं कि पैसे देते थे मकान दे सकते हैं जमीन दे सकते हैं परंतु ध्यान नहीं दे सकते हैं...!
संगठित नहीं दे सकते हैं आज मैं आपको संकेत नहीं दे सकता हूं कुछ नहीं आपको ध्यान नहीं दे....! 
सकता हूं आज मैं आपको ध्यान नहीं दे सकता हूं कोई भी गुरु मुझे संकेत नहीं दिए हैं मुझे पैसे दिए हैं....! 
संगीत नहीं मैं अभियान के माध्यम से संगीत को मैं पाया कोई भी बंदा मुझे ध्यान नहीं दिया है आपको ध्यान नहीं दिया क्योंकि सकते हैं हुआ है कि बांग्लादेश सकते हैं जमीन दे सकते हैं....! 
पैसे देते हैं हैं परंतु अ और आरोग्य नहीं दे सकते हैं शांति नहीं दे सकते हैं मुक्ति नहीं देख सकते हैं कि कृषि तो नास्तिक जब एक हम कोशिश करना ही चाहिए और सूर्य बनना ही चाहिए....! 
कृपया कोई भी आगे निकल संतों के साथ दोस्ती एवं संसद के साथ मस्ती की कुछ नहीं कोई सोच ना ही कोई विचार मेरे प्रिय दोस्तों के ऑन करो कि...! 
सांसदों के साथ दोस्ती एवं संसद के साथ मस्ती अ है जितना साधना करेंगे इतना आगे बढ़ते ही रहेंगे प्रैक्टिस आफ मेडिटेशन मैन प्वाइंट इफ यू वांट टू बिकम पॉइंट जैन यू मस्ट प्रैक्टिस मेडिटेशन का योग अस्तर कुरु कर्माणि योग होने के बाद सारे कर्म करें गे हुआ है....! 
क्या करूं फल को किया गया है को संयम चक्रवात धनंजय कुछ भी हो सिद्धि व सिद्धि समत्वं योग उच्यते अ की जय हो आपकी जय हो....!

मैं निश्चिंत होकर जीना चाहिए का मान हो अपमान हो किसी का जन्म हो किसी का मरण हो मौत हो मुस्कुराते हुए जीना चाहिए....! 
कि आज का अमीर कल का गरीब बना फिर भी मुश्किल आते ही जीना है कि आज प्याज हुई कल मेरा पति मर गया फिर भी मुस्कुराते रहना इसी को कहते हैं....! 

ध्यान दो कि Bigg Boss ज्ञान ध्यान से ही प्राप्त और ध्यान से ही उपलब्ध संस्था से जुड़ जाएंगे तो ध्यान में अग्रसर हो जाएंगे तो अपने पाते हैं...! 
कि फिलहाल इस वक्त कोई भी आंखें न खुलें मधुर संगीत के साथ होते हुए हम जानकारी की तो जान तीन गुना अधिक शक्तिशाली हो जाएगी सामूहिक जीवन में ध्यान तीन गुना अधिक शक्तिशाली पिरामिड के अंदर नीचे बैठकर ध्यान में तो तीन गुना अधिक शक्तिशाली हो जाएगी....! 
इसी लिए हम पिरामिड है मैं इतना करें कि आप आंखें न खुलें अ को भूल जाइए पति-पत्नी अड़ोस - पड़ोस श्री राम और कृष्ण को राम कौन सी समय लेन - देन उन लोगों से हमें अपने आप से और अपने आप को दिन दूसरों को देते हैं जो अपने आप से नहीं लेते नहीं - नहीं के पास नियुक्त हमेशा अपने आप से यह जो कुछ दिन में अपने आप से होती है...! 
मैं इतना करें कि आप आंखें न खुलें आ कि अगर कोई कहता है कि मैं आपको मुक्ति देता हूं...!
कि यह तो रोने की बात है हुआ है है ऐसे लोग हैं भारत देश में कि कोई भी आपको मुक्ति नहीं दिला सकता है...! 
असंभव है वह पागल खाना किए जाने चाहिए कि उसे बेचना चाहिए मेंटल हॉस्पिटल टिप्स अब इस आई विल गिव मुक्ति की मैं हल्की व शांति व्यवस्था तथा कोई भी आपको स्वस्थ कोई डॉक्टर नहीं दे सकते कोई डॉक्टर तो है...! 
ही नहीं एंड आफ्टर 10 मिनट्स कम इन अस कि युवा ख्याल प्रॉब्लम्स एंड यूज्ड यूज ऑयल जो प्रॉब्लम्स थ्रू हिंसायुक्त नेटवर्क प्रॉब्लम दूर हम सैनिटेशन फैसेलिटीज अवेलेबल इन ए कि फिलहाल इस वक्त कोई भी आंखें न खुलें सांसद के साथ दोस्ती एवं सांसद के साथ मस्ती की कर दो अजय को हुआ है...! 
झाला अजय को हुआ है कि आज कितना अच्छा दिन है कि हम सब ध्यान में में एक सांस मे डूब गए हैं...! 
इस पानी में जुट गई है तो स्नान श्वांसों मिट गई तो ध्यान है...! 
जैसे ही पानी को छूते ही शक्कर मैं निर्गुण हो जाती है है...! 
तो शान से मिलते ही मन भी निर्गुण हो जाती है कुछ देर नहीं लगती है शक्कर को निर्गुण बनने का पानी में डूब जाने का पानी में लीन होने का तो बिल्कुल जर्मन को कोई देश नहीं है....! 
सांसोंमें जब तक हो जाता है छूट जाती है जूस तुरंत ही शुरू हो जाती निर्गुण हो जाती है मैं इसे कट है...! 

विशेष उपाय :

प्रतिदिन भगवान विष्णु के "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
एकादशी का व्रत श्रद्धापूर्वक रखें।
गुरुवार को पीले वस्त्र, हल्दी, चने की दाल अथवा केले का दान करें।
शनिवार को तिल के तेल का दीपक जलाएँ तथा जरूरतमंदों की सहायता करें।
गाय को हरा चारा तथा पक्षियों को अन्न खिलाएँ।
पितरों की स्मृति में समय-समय पर दान एवं तर्पण करें।
प्रतिदिन गीता, विष्णु सहस्रनाम अथवा रामनाम का पाठ करें।
पवन पुत्र बताओ सांसद के पुत्र दोनों वायर्स उत्तर बन ओं बजरंगबली बनो शक्तिशाली अपनों बजरंगबली शक्तिशाली भाग्यशाली थी कि एक परम आत्मा अ का विधान है...! 
पवन पुत्र वधू अथवा सुखमण है और आखिरी पांच मिनट कृपया कोई भी आंखें न खुलें इंसान के साथ ज्योति एवं संतों के साथ मस्ती क्योंकि हम भोग यह बनना चाहते हैं....! 
क्योंकि हम भी संत नानेश्वर के जैसे बनना चाहते हैं जसवंत बुद्धि के जैसे संत महावीर के जैसे क्यों नहीं बनेंगे 9th मन्नत तरीका व्यास कि आज आप तरीका सीख रहे हैं...! 
इसे घर जाकर रियाद में रखिए कि शेष जिंदगी में छक्का मारो लो को वोट ना हो जाए बिना को इसको अहै जैसा क्रिकेट है...! 
वैसे जिंदगी है थे विनर्स को डोंट मत हो जाइए थे सैंक्चुअरी मारियो सेंचुरी ई कि ऋषि पनीर ऋषि अ थे जिनकी 24 घंटे हैं भला क्या करते हैं आप हैं....! 
और कितना पैसा चाहिए आपको मैं दो रोटी बस नहीं आती आपको में कितने रोटी खाते हैं कितने रोटी कमाते हैं...! 
कितने रोटी चाहिए मैं कल या परसो शरीर छोड़ने वाले हैं ऊपर जाएंगे तो आपका इंटरव्यू दिया जाएगा...! 
स्वामी कि आप किया है कि हैं तो क्या बताएंगे आप क्या है...! 
आपके पास बताने के लिए हां यह पत्नी दो बच्चे एक बंगला यह कार में मेजर बना एमपी बना प्राइम मिनिस्टर बना ठीक है...! 
सोनू जी दोबारा जाइए रफ रफ मास्क आएं नहीं तो चलिए पद्धति पर चले जाइए यहां कोई स्थान नहीं है और फिर थे रिटर्न ट्रिप में आ जाते हैं....! 
पुनरपि जननं पुनरपि मरणं अम्म अ तू कौन है बे जंगलों पुनरपि मरणं पुनरपि जननी जठरे ड्रॉ ए सनम ऐसा ही होगा सहित कई जन्म हो गए हैं....! 
कम से कम इस जन्म में आप अपने आप को पकड़ लीजिए है...! 
तो वह जोश पाइए में पशुपति बनने का स्वप्न देखिए को सौंप जोश ओपन हम देखते हैं....! 
वहीं हकीकत बनती है का आधार हाथ में कतिपय खोल दीजिए बहुत-बहुत शुक्रिया धन्यवाद जोरदार तालियां बजाएंगे जानते हैं...!
कि ऐसा आप हिंदी में टाइप क्यों एडमिट [प्रशंसा] कि गर्भवती इसमें हम करें हैं...! 
कि कितने लोगों को अच्छा लगा थोड़ा हाथ पर करता हूं मैं भी देखूं थैंक यू ऑल मैच मेरा आना धन हो गया है....! 
का जिक्र कितने लोग आज से दूसरों को बताएंगे दूसरों को शिक्षा देंगे ध्यान के बारे में जो ऐसा सीख चुके हैं...! 
भी देखो बस यही मैं चाहता हूं एक से अनेक अनेक से अनेकानेक बढ़ते ही जाएं मामला बिल्कुल साफ है...! 
शाकाहारी बनवाइए और ध्यानी उ है...! 
इस के अलावा और कुछ भी नहीं ना ही गंगा जाना नहीं सागर जाना नहीं व्रत करना नहीं दान करना अपना पैसा अपने पास रखिए है...!
है....! 
परंतु अपना समय जैसा मैं आपके लिए दे रहा हूं आप भी सभी लोगों के लिए मैं मेरे पास बहुत पैसे हैं...! 
मैं किसी कुछ नहीं देता हूं किसी को मेरे पैसे मेरे लिए पर तो मेरा समय देख 24 घंटे सभी के लिए कि अभियान में जब बैठेंगे तो मन सुनी हो जाती है...! 
यह बरसात ऊर्जा का बरसात महसूस करेंगे इस मिनट में हम बहुत कुछ बरसात महसूस कि कितने लोग ऐसे थे...! 
कि हां हम थोड़ा सा प्रत्यय है और दशम द्वार से आ इस प्रत्याहार ए टिन दशम द्वार से आ इज प्रत्याहार है है तो को उर्जा पाते ही चाहिए आपके सारे बीमारियां दूर हो जाएंगे...! 
डोंट गो टू Doctors डोंट टेक मेडिसिन ए हुआ है कि इतने सारे हमारे Doctors मास्टर से यह सब ध्यान करते हैं...! 

महत्वपूर्ण सावधानी :

ज्योतिषशास्त्र मार्गदर्शन का एक माध्यम माना जाता है। 
किसी भी ग्रहदोष या योग का फल व्यक्ति के कर्म, परिस्थितियों और संपूर्ण कुंडली के समग्र अध्ययन पर निर्भर करता है। 
इस लिए केवल एक योग या एक ग्रह देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। 
किसी योग्य एवं अनुभवी वैदिक ज्योतिषाचार्य से जन्मकुंडली और प्रश्नकुंडली का समुचित विश्लेषण करवाकर ही व्रत, पूजन अथवा उपाय अपनाना उचित माना जाता है।
व्रत और पूजन केवल इच्छापूर्ति का साधन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन, सेवा, भक्ति और सदाचार का मार्ग हैं। 
श्री ऋग्वेद, श्री यजुर्वेद, श्री विष्णु पुराण, श्री गरुड़ पुराण तथा सनातन व्रत परंपराएँ मनुष्य को यह प्रेरणा देती हैं कि वह अपने जीवन को धर्म, सत्य, करुणा और ईश्वर भक्ति से प्रकाशित करे। 
जब मनुष्य अपने कर्मों को शुद्ध करता है, नियमित जप, दान, सेवा और व्रत का पालन करता है तथा ईश्वर पर अटूट विश्वास रखता है, तब जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। 
यही मार्ग अंततः आत्मिक शांति, लोककल्याण और परम मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
किसी को जवाब नहीं देते हो कि किसी को हॉस्पिटल नहीं भेजते हैं...! 
यह सब एमबीबीएस एमएस डा मैं यहां कंटेस्टेंट स्पिरिचुअल साइंस एंड डिस्ट्रॉयज थे ग्रेटेस्ट स्पिरिचुअल साइंटिस्ट द सीन इसका नाम है को [ प्रशंसा ] कि अ अजय को यह मेरा सौभाग्य है...! 
कर दो कुछ तो गड़बड़ झाले जान केंद्र आयोजन किया गया है उनके सारे मास्टर आइए एक मास्टर प्लीज कम और जिसके इन तत्व जाएंगे सबको बिलाई ए कमेंट जस्ट एस ए आप सबको बजाइए है...! 
मुझे कल याद करो यार कि आई थिंक व्हाट शाल ई ई लुट लुट निकाले बजे मां कि यह रही हूं कि मेरा मन नहीं है मेरा मूड ठीक नहीं है...! 
यह करने का यह वर्ड ठीक है ताली बजा घ्र को भेजें आधुनिक पिंपल धातुओं यदि आप उच्च अभी देखिए...! 
🙏🌷राधे राधे 
जय श्री कृष्णा🌷🙏
!!!!! शुभमस्तु !!!
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