|| लड्डू गोपाल की बहन ||
|| पुत्र प्राप्ति की कामना, लड्डू गोपाल एवं उनकी बहन की भक्ति का आध्यात्मिक प्रभाव ||
श्री वैदिक ज्योतिषशास्त्र, खगोड़शास्त्र, अंकशास्त्र, हस्तरेखा, सामुद्रिकशास्त्र, वास्तु तथा वैदिक - पुराण परंपरा के संदर्भ में !
भारतीय सनातन परंपरा में संतान को केवल परिवार बढ़ाने का माध्यम नहीं माना गया, बल्कि उसे गृहस्थ जीवन की एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक जिम्मेदारी माना गया है।
संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति प्राचीन काल से ही ईश्वर की उपासना, मंत्र - जप, व्रत, दान, सात्त्विक जीवन तथा अपनी जन्मकुंडली के ग्रहयोगों का विचार करते आए हैं।
विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण के बालस्वरूप लड्डू गोपाल की भक्ति को वात्सल्य, प्रेम, करुणा और बालभाव से जोड़ा जाता है।
Brass Laddu Gopal Lord Krishna Statue | 1" Mini Krishna Murti Hindu God Idol Figurine Perfect for Decoration Car Dashboard Puja & Gifting Purpose Sculpture (Weight- 10gm)
Brand: Profound Craft https://link.amazon/B0aI7bwT8
| { Theme | Religious |
| Brand | Profound Craft |
| Colour | Brass(10gm_1")_Laddu Gopal |
| Style | Antique |
| Material | Brass |
| Occasion | Pooja, Thanksgiving |
| Product Dimensions | 20L x 20W x 25H Millimeters |
| Number of Pieces | 1 |
| Finish Type | Brass |
| Item Weight | 10 Grams } |
{ About this item
- Compact & Portable: Compact 1 Inch Brass Laddu Gopal Krishna Idol for Home Temple, Office Desk & Car Dashboard | Suitable for small spaces and easy to place in any setting.
- Premium Brass Material: Crafted from high-quality brass for durability and long-lasting shine.
- Elegant Decor Piece: Enhances the aesthetic appeal of your living room, office, or sacred space.
- Perfect for Gifting: A thoughtful and auspicious gift for festivals, housewarmings, or religious occasions.
- Easy to Clean: Simple to maintain; can be cleaned using a soft cloth and brass cleaner. }
ब्रजमंडल क्षेत्र में एक जंगल के पास एक गाँव बसा था।
जंगल के किनारे ही एक टूटी - फूटी झोपड़ी में एक सात वर्षीया बालिका अपनी बूढ़ी दादी के साथ रहा करती थी।
जिसका नाम उसकी दादी ने बड़े प्रेम से चंदा रखा था।
चंदा का उसकी दादी के अतिरिक्त और कोई सहारा नहीं था,उसके माता पिता की मृत्यु एक महामारी में उस समय हो गई थी जब चंदा की आयु मात्र दो वर्ष ही थी, तब से उसकी दादी ने ही उसका पालन - पोषण किया था।
यह भी समझना आवश्यक है कि पुत्र प्राप्ति की कोई निश्चित गारंटी केवल पूजा, मंत्र या किसी ग्रहयोग से नहीं दी जा सकती।
संतान का जन्म अनेक प्राकृतिक, जैविक और दैविक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से “पुत्र योग” का अर्थ भी केवल पुरुष-संतान की निश्चित घोषणा करना नहीं, बल्कि संतान - सुख, संतान प्राप्ति की संभावना, संतान के संबंध में आने वाले अवरोध और उनके समय का अध्ययन करना है।
इस लिए पुत्र की इच्छा के साथ स्वस्थ, सद्गुणी और योग्य संतान की प्रार्थना करना अधिक श्रेष्ठ माना जाना चाहिए।
उस बूढ़ी स्त्री के पास भी कमाई का कोई साधन नहीं था इस लिए वह जंगल जाती और लकड़िया बीन कर उनको बेचती और उससे जो भी आय होती उससे ही उनका गुजारा चलता था।
क्योंकि घर में और कोई नहीं था इस लिए दादी चंदा को भी अपने साथ जंगल ले जाती थी।
दोनों दादी - पोती दिन भर जंगल में भटकते और संध्या होने से पहले घर वापस लौट आते ... यही उनका प्रति दिन का नियम था।
चंदा अपनी दादी के साथ बहुत प्रसन्न रहती थी, किन्तु उसको एक बात बहुत कचोटती थी कि उसका कोई भाई या बहन नहीं थे।
गांव के बच्चे उसको इस बात के लिए बहुत चिढ़ाते थे तथा उसको अपने साथ भी नहीं खेलने देते थे, इससे वह बहुत दुःखी रहती थी।
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जन्मकुंडली में संतान-सुख का विचार :
वैदिक ज्योतिष में संतान संबंधी विचार के लिए मुख्य रूप से पंचम भाव, पंचमेश, गुरु ग्रह, सप्तम भाव, नवम भाव तथा सप्तमांश कुंडली का अध्ययन किया जाता है।
पंचम भाव को संतान, बुद्धि, पूर्व पुण्य, संस्कार और रचनात्मकता से संबंधित माना जाता है।
गुरु को संतान - सुख का प्रमुख कारक माना जाता है।
यदि जन्मकुंडली में पंचम भाव मजबूत हो, पंचमेश शुभ स्थिति में हो, गुरु का शुभ संबंध पंचम भाव या पंचमेश से हो और सप्तमांश में भी अनुकूल स्थिति दिखाई दे, तो ज्योतिषीय परंपरा में संतान - सुख के अच्छे संकेत माने जाते हैं।
इसके विपरीत पंचम भाव पर अत्यधिक पाप प्रभाव, पंचमेश की दुर्बलता, गुरु की कमजोरी अथवा संबंधित दशा - अंतरदशा में प्रतिकूलता हो तो संतान प्राप्ति में विलंब या चिंता की स्थिति बताई जा सकती है।
लेकिन ऐसे योगों को अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
किसी एक ग्रह या एक योग को देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
जन्मकुंडली के साथ नवांश और सप्तमांश का अध्ययन भी किया जाता है।
संतान संबंधी प्रश्न में केवल जन्मलग्न देखकर फलादेश करना अधूरा माना जाएगा।
अनेक बार वह अपनी दादी से पूछती की उसका कोई भाई क्यों नहीं है।
तब उसकी दादी उसको प्रेम से समझाती,कौन कहता है कि तेरा कोई भाई नहीं है, वह है ना कृष्ण कन्हैया वही तेरा भाई है, यह कह कर दादी लड्डू गोपाल की और संकेत कर देती।
चंदा की झोपडी में एक पुरानी किन्तु बहुत सुन्दर लड्डू गोपाल की प्रतीमा थी जो उसके दादा जी लाये थे।
चंदा की दादी उनकी बड़े मन से सेवा किया करती थी।
बहुत प्रेम से उनकी पूजा करती और उनको भोग लगाती।
निर्धन स्त्री पकवान मिष्ठान कहाँ से लाये जो उनके खाने के लिए रुखा सूखा होता वही पहले भगवान को भोग लगाती फिर चंदा के साथ बैठ कर खुद खाती।
चंदा के प्रश्न सुनकर वह उस लड्डू गोपाल की और ही संकेत कर देती।
बालपन से चंदा लड्डू गोपाल को ही अपना भाई मानने लगी।
प्रश्नकुंडली से संतान संबंधी प्रश्न :
जब किसी व्यक्ति के मन में संतान संबंधी प्रश्न अत्यंत प्रबल हो और वह उसी समय ज्योतिषी से प्रश्न करता है, तब प्रश्नकुंडली के माध्यम से भी स्थिति का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न लग्न, पंचम भाव, पंचमेश, गुरु, चंद्रमा और संबंधित भावों की शक्ति तथा शुभ - अशुभ संबंधों को देखा जाता है।
प्रश्नकुंडली का उद्देश्य व्यक्ति के वर्तमान प्रश्न और परिस्थितियों को समझना है।
इस लिए इसे जन्मकुंडली के साथ जोड़कर देखना अधिक उपयोगी हो सकता है।
यदि दोनों में संतान - सुख के समान संकेत मिलें तो ज्योतिषीय निष्कर्ष अधिक मजबूत माना जाता है।
वह जब दुःखी होती तो लड्डू गोपाल के सम्मुख बैठ कर उनसे बात करने लगती और कहती की भाई तुम मेरे साथ खेलने क्यों नहीं आते,सब बच्चे मुझको चिढ़ाते है।
मेरा उपहास करते है, मुझको अपने साथ भी नहीं खिलाते, में अकेली रहती हूँ, तुम क्यों नहीं आते।
क्या तुम मुझ से रूठ गए हो, जो एक बार भी घर नहीं आते, मैने तो तुम को कभी देखा भी नहीं।
अपनी बाल कल्पनाओं में खोई चंदा लड्डू गोपाल से अपने मन का सारा दुःख कह देती।
चंदा का प्रेम निश्च्छल था,वह अपने भाई को पुकारती थी।
उसके प्रेम के आगे भगवान भी नतमस्तक हो जाते थे, किन्तु उन्होंने कभी कोई उत्तर नहीं दिया।
एक दिन चंदा ने अपनी दादी से पूछा! दादी मेरे भाई घर क्यों नहीं आते, वह कहाँ रहते हैं।
तब दादी ने उसको टालने के उद्देश्य से कहा तेरा भाई जंगल में रहता है, एक दिन वह अवश्य आएगा।
चंदा ने पूछा क्या उसको जंगल में डर नहीं लगता, वह जंगल में क्यों रहता है।
तब दादी ने उत्तर दिया नहीं वह किसी से नहीं डरता, उसको गांव में अच्छा नहीं लगता इसलिए वह जंगल में रहता है।
धीर- धीरे रक्षा बंधन का दिन निकट आने लगा, गाँव में सभी लड़कियों ने अपने भाइयों के लिए राखियां खरीदी, वह चंदा को चिढ़ाने लगी कि तेरा तो कोई भाई नहीं तू किसको राखी बंधेगी।
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गोचर के ग्रह और संतान-सुख का समय :
गोचर में गुरु का पंचम भाव, पंचमेश, लग्न या संबंधित शुभ स्थानों से संबंध बनना परंपरागत ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी प्रकार शनि, राहु और केतु के गोचर को भी देखा जाता है, विशेषकर तब जब वे जन्मकुंडली के संतान संबंधी भावों को प्रभावित कर रहे हों।
लेकिन गोचर अकेला घटना नहीं कराता।
सामान्यतः दशा, अंतरदशा, जन्मकुंडली और गोचर—
इन सभी का समन्वित अध्ययन किया जाता है।
इस लिए “गुरु पंचम भाव में आ गया, इसलिए निश्चित रूप से पुत्र होगा” जैसा सरल निष्कर्ष शास्त्रीय दृष्टि से उचित नहीं है।
भगवान से प्रार्थना की जा सकती है—
लड्डू गोपाल की बहन की भक्ति :
उधर गोविन्द चंदा की समस्त चेष्टाओं के साक्षी बन रहे थे।
रोते - रोते चंदा को याद आया कि दादी ने कहा था कि उसका भाई जंगल में रहता है, बस फिर क्या था वह दादी को बिना बताए नंगे पाँव ही जंगल की और दौड़ पड़ी, उसने मन में ठान लिया था कि वह आज अपने भाई को लेकर ही आएगी।
जंगल की काँटों भरी राह पर वह मासूम दौड़ी जा रही थी,श्री गोविन्द उसके साक्षी बन रहे थे।
तभी श्री हरी गोविन्द पीढ़ा से कराह उठे उनके पांव से रक्त बह निकला, आखिर हो भी क्यों ना श्री हरी का कोई भक्त पीढ़ा में हो और भगवान को पीड़ा ना हो यह कैसे संभव है, जंगल में नन्ही चंदा के पाँव में काँटा लगा तो भगवान भी पीढ़ा कराह उठे।
उधर चंदा के पैर में भी रक्त बह निकला वह वही बैठ कर रोने लगी, तभी भगवान ने अपने पाँव में उस स्थान पर हाथ फैरा जहा कांटा लगा था, पलक झपकते है चंदा में पाँव से रक्त बहना बंद हो गया और दर्द भी ना रहा वह फिर से उठी और जंगल की और दौड़ चली।
इस बार उसका पाँव काँटों से छलनी हो गया किन्तु वह नन्ही सी जान बिना चिंता किये दौड़ती रही उसको अपने भाई के पास जाना था अंततः एक स्थान पर थक कर रुक गई और रो-रो कर पुकारने लगी भाई तुम कहाँ हों, तुम आते क्यों नहीं।
अब श्री गोविन्द के लिए एक पल भी रुकना कठिन था, वह तुरंत उठे और एक ग्यारहा -बारहा वर्ष के सुन्दर से बालक का रूप धारण किया तथा पहुँच गए चंदा के पास।
उधर चंदा थक कर बैठ गई थी और सर झुका कर रोये जा रही थी तभी उसके सर पर किसी के हाथ का स्पर्श हुआ।
और एक आवाज सुनाई दी, में आ गया मेरी बहन, अब तू ना रो।
चंदा ने सर उठा कर उस बालक को देखा और पूंछा क्या तुम मेरे भाई हो ?
तब उत्तर मिला "हाँ चंदा, में ही तुम्हारा भाई हूँ" यह सुनते ही चंदा अपने भाई से लिपट गई और फूट फूट कर रोने लगी।
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ऋग्वेद और वैदिक भावना :
वैदिक परंपरा में गृहस्थ जीवन, परिवार, स्वास्थ्य, समृद्धि और संतति के लिए मंगलकामना के अनेक मंत्र मिलते हैं।
वैदिक दृष्टिकोण में संतान केवल वंशवृद्धि नहीं बल्कि धर्म, संस्कार और जीवन की निरंतरता से जुड़ी जिम्मेदारी है।
इसी भावना से संतान प्राप्ति की प्रार्थना करते समय केवल “पुत्र” की मांग के स्थान पर “स्वस्थ, दीर्घायु, सदाचारी और संस्कारी संतान” की कामना करना अधिक व्यापक वैदिक भावना के अनुरूप माना जा सकता है।
तभी भक्त और भगवान के मध्य भाव और भक्ति का एक अनूठा दृश्य उत्त्पन्न हुआ, भगवान वही धरती पर बैठ गए उन्होंने नन्ही चंदा के कोमल पैरो को अपने हाथो में लिया और उसको प्रेम से देखा।
वह छोटे - छोटे कोमल पांव पूर्ण रूप से काँटों से छलनी हो चुके थे उनमे से रक्त बह रहा था, यह देख कर भगवान की आँखों से आंसू बह निकले उन्होंने उन नन्हे पैरो को अपने माथे से लगाया और रो उठे,अद्भुद दृश्य,बहन भाई को पाने की प्रसन्नता में रो रही थी और भगवान अपने भक्त के कष्ट को देख कर रो रहे थे।
श्री हरी ने अपने हाथो से चंदा के पैरो में चुभे एक एक कांटे को बड़े प्रेम से निकाला फिर उसके पैरो पर अपने हाथ का स्पर्श किया, पलभर में सभी कष्ट दूर हो गया।
चंदा अपने भाई का हाथ पकड़ कर बोली भाई तुम घर चलो, कल रक्षा बंधन है, में भी रक्षा बंधन करुँगी।
भगवान बोले अब तू घर जा दादी प्रतीक्षा कर रही होगी, में कल प्रातः घर अवश्य आऊंगा।
ऐसा कहकर उसको विश्वाश दिलाया और जंगल के बाहर तक छोड़ने आए।
अब चंदा बहुत प्रसन्न थी उसकी सारी चिंता मिट गई थी, घर पहुंची तो देखा कि दादी का रो रो कर बुरा हाल था चंदा को देखते ही उसको छाती से लगा लिया।
SKARSA Laddu Gopal/Radha Rani Marble Dust Idol 6 Inch | Janmashtami
| { Theme | Love, Spritual |
| Brand | SKARSA INNOVATIONS |
| Colour | White & Golden |
| Style | Art Deco |
| Material | Marble |
| Occasion | Anniversary, Diwali, Housewarming, Janmash |
| Product Dimensions | 13L x 10W x 15H Centimeters |
| Cartoon Character | Laddu Gopal Idol |
| Specific Uses For Product | Home Decor, Pooja |
| Age Range (Description) } | All Ages |
{ About this item
- Crafted from high-quality marble dust with a durable finish, this Laddu Gopal idol features intricate hand-painted detailing, giving it an elegant and premium appearance.
- Measuring approximately 10 cm (L) × 13 cm (W) × 15 cm (H), this 6-inch Laddu Gopal idol is ideal for home temples, pooja rooms, mandirs, office desks, and devotional décor.
- A beautiful Baal Gopal Krishna idol for Janmashtami celebrations, daily worship, festive decoration, and spiritual practices, bringing positivity and divine blessings to your home.
- An excellent choice for home décor as well as gifting on housewarming ceremonies, weddings, anniversaries, Diwali, birthdays, festivals, and special occasions.
- Wipe gently with a soft, dry cloth to maintain its shine. Avoid using water or harsh cleaning chemicals to preserve the hand-painted finish. }
श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण का बालभाव :
श्रीमद्भागवत में श्रीकृष्ण की बाललीलाओं का वर्णन भक्तिभाव का अत्यंत महत्वपूर्ण आधार है।
यशोदा माता और श्रीकृष्ण के संबंध में वात्सल्य - भक्ति का जो स्वरूप सामने आता है, वह भक्त को यह अनुभव कराता है कि ईश्वर को केवल दूर स्थित परम सत्ता के रूप में ही नहीं, बल्कि बालक के रूप में भी प्रेम किया जा सकता है।
लड्डू गोपाल की सेवा इसी वात्सल्य भावना को घर-घर में जीवित करती है।
जब कोई भक्त बालकृष्ण को अपने घर का सदस्य मानकर उनकी सेवा करता है, तब पूजा केवल कर्मकांड नहीं रहती; वह प्रेम और जिम्मेदारी का भाव बन जाती है।
संतान प्राप्ति के लिए सरल आध्यात्मिक नियम :
संतान - सुख की कामना करने वाले दंपति निम्न सात्त्विक नियम अपना सकते हैं—
1. प्रतिदिन स्नान करके श्रद्धा से लड्डू गोपाल का दर्शन करें।
2. भगवान को सात्त्विक भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें।
3. अपनी क्षमता के अनुसार श्रीकृष्ण नाम का जाप करें।
4. गुरुवार को गुरु, भगवान विष्णु अथवा श्रीकृष्ण की पूजा विशेष श्रद्धा से की जा सकती है।
5. जरूरतमंद बच्चों, गौसेवा, अन्नदान या शिक्षा से संबंधित सेवा अपनी क्षमता के अनुसार करें।
6. पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति सम्मान, प्रेम और विश्वास बनाए रखें।
7. संतान के विषय में अत्यधिक भय, दबाव या निराशा से बचें।
यदि संतान प्राप्ति में चिकित्सकीय कठिनाई हो तो योग्य स्त्रीरोग विशेषज्ञ या प्रजनन विशेषज्ञ से सलाह लेना भी आवश्यक है।
धार्मिक आस्था और चिकित्सा एक - दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
चंदा बहुत पुलकित थी बोली दादी अब तू रो मत कल मेरा भाई आएगा, में भी रक्षा बंधन करुँगी।
दादी ने अपने आंसू पोंछे उसने सोंचा कि जंगल में कोई बालक मिल गया होगा जिसको यह अपना भाई समझ रही है, चंदा ने दादी से जिद्द करी और एक सुन्दर सी राखी अपने भाई के लिए खरीदी।
अगले दिन प्रातः ही वह नहा - धो कर अपने भाई की प्रतीक्षा में द्वार पर बैठ गई, उसको अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी थोड़ी देर में ही वह बालक सामने से आते दिखाई दिया, उसको देखते ही चंदा प्रसन्नता से चीख उठी दादी भाई आ गया और वह दौड़ कर अपने भाई के पास पहुँच गई, उसका हाथ पकड़ कर घर में ले आई।
वास्तु की दृष्टि :
वास्तु परंपरा में घर की स्वच्छता, प्रकाश, वायु, पूजा स्थान और सकारात्मक वातावरण को महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूजा स्थान को स्वच्छ और व्यवस्थित रखना चाहिए।
लड्डू गोपाल को रखने का स्थान ऐसा हो जहां नियमित रूप से पूजा और सेवा संभव हो।
वास्तु के नाम पर किसी कमरे, दिशा या वस्तु को देखकर संतान प्राप्ति की निश्चित गारंटी देना उचित नहीं है।
यदि घर में वास्तु संबंधी समस्या महसूस हो तो पूरे भवन की संरचना, प्रवेश, दिशाओं, उपयोग और निवासियों की आवश्यकताओं को देखकर समग्र विचार किया जाना चाहिए।
अपनी टूटी - फूटी चारपाई पर बैठाया बड़े प्रेम से भाई का तिलक किया आरती उतारी और रक्षा बंधन किया।
सुन्दर राखी देख कर भाई बहुत प्रसन्न था, भाई के रूप में भगवान उसके प्रेम को देख कर विभोर हो उठे थे, अब बारी उनकी थी।
भाई ने अपने साथ लाए झोले को खोला तो खुशिओं का अम्बार था, सुन्दर, कपडे, मिठाई, खिलोने, और भी बहुत कुछ।
चंदा को मानो पंख लग गए थे!उसकी प्रसन्नता का ठिकाना नहीं था।
कुछ समय साथ रहने के बाद वह बालक बोला अब मुझको जंगल में वापस जाना है।
चंदा उदास हो गई, तब वह बोला तू उदास ना हो, आज से प्रतिदिन में तुमसे मिलने अवश्य आऊंगा।
अब वह प्रसन्न थी।
बालक जंगल लौट गया।
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अंकशास्त्र, हस्तरेखा और सामुद्रिकशास्त्र :
अंकशास्त्र में जन्मतिथि के अंकों के आधार पर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों का सांकेतिक अध्ययन किया जाता है।
हस्तरेखा में संतान संबंधी संकेतों के लिए परंपरागत रूप से हाथ की विभिन्न रेखाओं और पर्वतों का निरीक्षण किया जाता है।
सामुद्रिकशास्त्र में शरीर के विभिन्न लक्षणों का सांकेतिक अर्थ बताया गया है।
लेकिन इन सभी विधाओं को निश्चित चिकित्सकीय या जैविक भविष्यवाणी का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
एक अनुभवी ज्योतिषी को जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, दशा, गोचर और उपलब्ध अन्य संकेतों को समन्वित करके ही विचार करना चाहिए।
उधर दादी असमंजस में थी कौन है यह बालक,उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
किन्तु हरी के मन की हरी ही जाने।
भाई के जाने के बाद जब चंदा घर में वापस लौटी तो एकदम ठिठक गई उसकी दृष्टि लड्डू गोपाल की प्रतीमा पर पड़ी तो उसने देखा कि उनके हाथ में वही राखी बंधी थी जो उसने अपने भाई के हाथ में बांधी थी।
उसने दादी को तुरंत बुलाया यह देख कर दादी भी अचम्भित रह गई, किन्तु उसने बचपन से कृष्ण की भक्ति करी थी वह तुरंत जान गई कि वह बालक और कोई नहीं स्वयं श्री हरी ही थे, वह उनके चरणो में गिर पड़ी और बोली, है छलिया, जीवन भर तो छला जीवन का अंत आया तो अब भी छल कर चले गए।
वह चंदा से बोली अरी वह बालक और कोई नहीं तेरा यही भाई था।
यह सुन कर चंदा भगवान की प्रतीमा से लिपट कर रोने लगी रो रो कर बोली कहो ना भाई क्या वह तुम ही थे, में जानती हूँ वह तुम ही थे, फिर सामने क्यों नहीं आते, छुपते क्यों हो।
दादी पोती का निर्मल प्रेम ऐसा था कि भगवान भी विवश हो गए।
लीला धारी तुरंत ही विग्रह से प्रकट हो गए और बोले हां चंदा में ही तुम्हारा वह भाई हूँ, तुमने मुझको पुकारा तो मुझको आना पड़ा।
और में कैसे नहीं आता, जो भी लोग ढोंग, दिखावा, पाखंड रचते है उनसे में बहुत दूर रहता हूँ, किन्तु जब मेरा कोई सच्चा भक्त प्रेम भक्ति से मुझको पुकारता है तो मुझको आना ही पड़ता है।
भक्त और भगवान की प्रेममय लीला चल रही थी, और दादी वह तो भगवान में लीन हो चुकी थी रह गई, चंदा तो उस दिन के बाद से गाँव में उनको किसी ने नहीं देखा, कोई नहीं जान पाया की आखिर दादी - पोती कहा चले गए।
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उपायों :
उपाय का अर्थ केवल ग्रह को “बदल देना” नहीं है।
उपाय का उद्देश्य मनुष्य के कर्म, विचार, व्यवहार और मानसिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है।
श्रीकृष्ण की भक्ति में सबसे महत्वपूर्ण उपाय श्रद्धा, प्रेम, सेवा, सत्य, संयम और सात्त्विक आचरण है।
लड्डू गोपाल को भोग लगाते समय मन में यह भावना रखें—
“हे नंदलाल! हमें केवल संतान नहीं, बल्कि ऐसी संतान का सौभाग्य दें जिसे हम प्रेम, संस्कार और धर्म का मार्ग दे सकें।
यदि हमारे कर्मों में कोई बाधा है तो उसे समझने और सुधारने की बुद्धि दें।”
यही प्रार्थना भक्त के मन में धैर्य उत्पन्न करती है।
जन्मकुंडली में पंचम भाव, पंचमेश, गुरु और सप्तमांश संतान - सुख के अध्ययन में महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्नकुंडली वर्तमान प्रश्न की स्थिति को समझने में सहायता कर सकती है और गोचर ग्रह समय के संकेत दे सकते हैं।
अंकशास्त्र, हस्तरेखा, सामुद्रिकशास्त्र और वास्तु को सहायक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा सकता है।
लड्डू गोपाल की भक्ति मनुष्य के भीतर वात्सल्य, प्रेम, धैर्य और ईश्वर - समर्पण का भाव जगाती है।
श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा जी की भक्ति भाई - बहन के पवित्र प्रेम और पारिवारिक सौहार्द की सुंदर स्मृति कराती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुत्र प्राप्ति की इच्छा को ईश्वर के प्रति श्रद्धा के साथ रखा जाए, लेकिन संतान के लिंग को लेकर निश्चित भविष्यवाणी या गारंटी का दावा न किया जाए।
ईश्वर से स्वस्थ, संस्कारी, सद्गुणी और दीर्घायु संतान की प्रार्थना ही सबसे सुंदर कामना है।
जब ज्योतिषीय विचार, सात्त्विक आचरण, चिकित्सा संबंधी उचित सलाह, भगवान की भक्ति और सकारात्मक जीवन - दृष्टि एक साथ चलते हैं, तब संतान की कामना केवल इच्छा नहीं रहती—
वह एक पवित्र प्रार्थना और माता - पिता बनने की जिम्मेदारी में बदल जाती है।
श्री लड्डू गोपाल की जय। श्री सुभद्रा माता की जय। प्रभु की लीला प्रभु ही जाने... भगवान लड्डू गोपाल की जय हो....... हर हर महादेव जय मां अंबे मां !!!!! शुभमस्तु !!!
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पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
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